Monday, 13 October 2014

दीवार पत्रिका हमारे विद्यालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है

पिछली पोस्ट में आपने बाल पत्रिका ‘नंदन’ के अक्टूबर अंक में प्रकाशित आलेख ‘दीवार पत्रिका’ पढ़ा। उस आलेख को पढ़कर राजकीय इंटर कालेज देवलथल जिला -पिथोरागढ़ की एक छात्रा ने नंदन के संपादक के नाम पत्र लिखा है। यह पत्र इस रूप में महत्वपूर्ण है कि इसमें दीवार पत्रिका के निर्माण की प्रक्रिया पर संक्षिप्त में प्रकाश डाला गया है। इसमें आप दीवार पत्रिका को बच्चों की नजर से देख पाएंगे। प्रस्तुत है कक्षा दस में अध्ययनरत छात्रा रंजना सामंत का पत्र-
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दीवार पत्रिका हमारे विद्यालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है

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आदरणीय संपादक महोदय,
मैं विगत एक वर्ष से आपकी पत्रिका ‘नंदन’ की नियमित पाठक हूं। मैंने इस पत्रिका क अक्टूबर-14 के अंक में दीवार पत्रिका संबंधी लेख पढ़ा। मुझे अच्छा लगा। मुझे आपको यह जानकारी देेते हुए अंत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इस प्रकार की दीवार पत्रिका हम विगत 4-5 सालों से अपने विद्यालय में बनाते आ रहे हैं। पहले हमारी दीवार पत्रिका ‘उमंग’ नाम से प्रकाशित होती थी जो कि दिसंबर 2013 से ‘कल्पना’ नाम से बनती है।इसे हमारे विद्यालय की लाइब्रेरी में चयनित संपादक मंडल के द्वारा बनाया जाता है।
  दीवार पत्रिका बनाने के लिए हम दो-तीन चार्टों को एक साथ चिपकाते हैं ताकि अधिक से अधिक रचनाएं इसमें प्रकाशित कर सकें। विद्यालय के अधिकांश विद्यार्थी अपनी-अपनी रचनाएं दीवार पत्रिका हेतु लाते हैं। इसके पश्चात संपादक मंडल द्वारा इन लेखों की छटनी होती है और वे अच्छे लेखों को ‘कल्पना’ में स्थान देते हैं।इसमें विद्यार्थियों द्वारा कुछ रचनाएं जैसे-कहानी ,कविता, चुटकुले,पहेलियां,लोककथा,लेख,साक्षात्कार आदि स्वरचित होती हैं ,तथा कुछ रचनाएं जैसे-जीवनी,आत्मकथा,विज्ञान के प्रयोग, तथ्य निराले व सामान्य ज्ञान वे पुस्तकों तथा पत्रिकाओं से लाते हैं। हमारी दीवार पत्रिका पन्द्रह दिन में एक बार निकलती है। हमारी दीवार पत्रिका में चित्रकला का भी महत्वपूर्ण स्थान है। विद्यार्थी अपने द्वारा बनाए गए चित्र भी दीवार पत्रिका में सम्मलित करने लिए लाते हैं। जब दीवार पत्रिका पूर्णतः बन जाती है तो उसे विद्यालय में ऐसे स्थान पर लटका दिया जाता है जहां  सभी अध्यापक व विद्यार्थी उसे देख सकें,पढ़ सकें तथा उसमें से ज्ञान अर्जित कर सकें।इस पत्रिका को देखकर धीरे-धीरे सभी बच्चे इसमें भाग लेने लगे हैं। यह एक चलता-फिरता ज्ञान का भंडार है जिसे हम कहीं भी कभी भी ले जा सकते हैं।
    दीवार पत्रिका से बच्चों को कई प्रकार के लाभ हो रहे हैं। इसके द्वारा उनमें रचनात्मकता ,लेखन क्षमता व अभिव्यक्ति क्षमता बढ़ी है,उनकी भाषा-शैली  का भी विकास हो रहा है। उनकी गलतियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं क्योंकि वे दीवार पत्रिका में लिखने का काम करते हैं, और लेखन माध्यम से ही ऐसा संभव है, मैं एक और विशेष बात अपनी दीवार पत्रिका के बारे में बताना चाहती हूं कि हमारा संपादक मंडल पत्रिका में तरह-तरह की प्रतियोगिताएं भी करवाता है,जिसमें सभी विद्यार्थी प्रतिभाग करते हैं तथा जो विद्यार्थी स्थान प्राप्त करते हैं,उन्हें पुरस्कार देकर प्रेरित किया जाता है। इससे विद्यार्थियों का पूर्ण रूप से विकास होता है,अतः दीवार पत्रिका हमारे विद्यालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

1 comment:

  1. रंजना सामन्त का यह पत्र दीवार पत्रिका की बच्चों के भाषायी विकास में सहयोग और योगदान को प्रमाणित करता है। भाषायी कौशलों के विकास के लिए आवश्यक है कि बच्चों को वैसे अवसर सहज रूप से उपलब्ध हों या उपलब्ध कराने के प्रयास किये जायें । स्वयं किया हुआ होनें से इस अर्जित ज्ञान का उन्हें बोध होता है। वे उस अनुभव से गुजर चुके होते हें इसलिए यह स्थायी होता है । यह पत्र मुझे रंजना में एक उभरती साहित्यिक प्रतिभा के दर्शन कराता है । साथ ही उनके शिक्षक की भी सराहना करनी होगी कि उन्होंने बच्चों के लिए ऐसा प्रयास और अवसर उपलब्ध कराया ।बधाई ।

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