घनश्याम भट्ट जी के नवाचारों से हम सोशियल मीडिया के माध्यम से परिचित होते रहते हैं . वह संस्कृत भाषा के शिक्षक हैं . बच्चों में रचनात्मकता के विकास के लिए नए –नए अवसर उन्हें उपलब्ध कराते रहते हैं . पिछले दिनों ‘दीवार पत्रिका एक अभियान’ समूह में उनकी यह पोस्ट पढ़ी जिसमें उन्होंने अपने विद्यालय से प्रारम्भ की गयी दीवार पत्रिका के फोटोग्राफ्स लगाये थे -
बाल सृजन -दीवार पत्रिका,प्रथम अंक, रा.उ.मा.वि.,दुदुली,नैनीताल, दीवार पत्रिका जिसे मेरे विद्यार्थियों ने कक्षा-6 से 10 तक के बच्चों की मेहनत का परिणाम है | इसमें सभी बच्चों ने बहुत उत्साह से भाग लिया ,यहाँ तक कि बच्चों की रचनाएँ इतनी आई संपादक मुकेश शर्मा कक्षा-10 व उप संपादक नीरज शर्मा कक्षा-10 भी परेशान हो गए कि किसे छोड़ा जाय किसे रखा जाय | बच्चों ने अपने काव्य-कौशल व बिम्ब निर्माण की कला की प्रतिभा के अपने अन्दर होने का अहसास तो कराया ही साथ ही कला कौशल का भी अद्भुत प्रदर्शन किया| संपादक मण्डल ने पत्रिका का कलेवर यथा अपेक्षित कृतियों को स्थान देकर,सुन्दर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी | विद्यार्थियों के इस उत्साह से यह तो सिद्ध हो ही जाता है कि बच्चों को उनके अन्दर छिपी प्रतिभा को प्रकट करने का सक्रिय अवसर उपलब्ध होने चाहिए बस, उनके अन्दर न जाने क्या-क्या आविष्कार छुपा हुआ है | केवल किताबी ज्ञान से हम न तो अच्छी शिक्षा दे सकते है न ही अच्छे इन्सान का निर्माण |एक शायरी याद आ रही है - धूप में आ के देखो घटाओं में नहा के देखो, जिन्दगी क्या है किताबों को हटाके देखो | पुनेठा जी, दीक्षित जी जैसे शिक्षक साथियों का यह अभियान निश्चित ही क्रन्तिकारी व सामयिक आवश्यकता है | बच्चों में छोटी अवस्था से ही यदि साहित्यिक अभिरुचि के बीज बोए जाएँ तो उनकी संवेदनशीलता व भावनात्मक विकास होगा जोकि आज ह्रास हो रहे नैतिक व्यक्तित्व के उत्थान के लिए बहुत ही आवश्यक है| बच्चे कहानियां भी लिखना चाहते थे , वे लिखते भी है पर हमने पहला अंक कविताओं को ही समर्पित किया है | अगले अंकों में सभी विधाओं को स्थान देने का प्रयास किया जाएगा | इस कार्य में दिशानिर्देशन व वित्तीय सहायता मैंने की परन्तु पूरा कार्य बच्चों ने ही मिलकर किया | आपका मार्गदर्शन एवं सुझाव सदैव आमंत्रित हैं.
बहुत अच्छा
लगा कि अपने विद्यालय में दीवार पत्रिका प्रारम्भ कर वह भी इस अभियान में शामिल
हुए . हमने घनश्याम भट्ट जी से दीवार
पत्रिका शुरू करने सम्बन्धी अनुभव को ब्लॉग के लिए लिखने का अनुरोध किया .उन्होंने
हमारे अनुरोध को स्वीकार करते हुए हमारे पाठकों के साथ अपने विचार शेयर किये हैं
,हम उनका आभार व्यक्त करते हैं . आशा करते हैं कि दीवार पत्रिका उनके विद्यालय की
एक स्थायी गतिविधि बनकर बच्चों की रचनात्मकता को मंच प्रदान करती रहेगी .
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